बाइडन ने दी धमकी, अब बचना मुश्किल है ISIS-K गट का

दस साल के बाद फिर से अफगानिस्तान में आम लोगों के साथ-साथ अमेरिकी सैनिकों के साथ ऐसा हुआ जिससे अमेरिका क्या पूरी दुनिया हील गई। काबुल में सीरियल ब्लास्ट 26 अगस्त 2021 को हुआ। जिससे साल 2011 के जख्मों को फिर से ताजा कर दिया। तारीख 6 अगस्त 2011 जगह अफगानिस्तान तालिबान ने अमेरिका के हेलीकॉप्टर को रॉकेट से उदा दिया था।

हमले में अमेरिकी सेना के 30 जवानों की जान गई। वह जख्म फिर से ताजा हो गया। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह अपने सैनिकों की मौत का बदला लेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने ऐलान किया है कि आई एस आई एस के खुरासान गट को सजा जरूर मिले गी। उसके आतंकी नेताओं का सफाया जरूर किया जाएगा।

जो बाइडन ने कहा है कि “जिन लोगो ने भी इस हमले को अंजाम दिया है और वे लोग जो अमेरिका की बर्बादी चाहते हैं। ये जान ले की अमेरिका माफ़ नहीं करेगा और अमेरिका भूलेगा नहीं। वनम्रता के साथ कहना चाहता हु कि हम हमले का आदेश देने वाले ISIS के नेताओ को ढूंढ निकालेंगे और मुझे कुछ हद तक पता है की वे कौन हैं। अमेरिका बड़े सैन्य अभियान के बिना भी उन्हें ढूंढ निकलेगा और चाहे वो जहा कही भी हो।”

दरअसल काबुल धमाके का ISIS-K गट ने जिम्मेदारी ली हैं। आत्मघाती हमलावर की तस्वीर भी जारी की हैं। अब्दुल रेहमान लोधरी नाम के आतंकी ने खुद को धमाका करके उड़ाया था। बाइडन पहले ही कह चुके थे ISIS-K गट तालिबान और अमेरिका दोनों का दुश्मन हैं। काबुल से लोगो को निकलने का मिशन बेहद खरनाक हैं। अब काबुल धमाके के बाद बाइडन ने ISIS-K गट से बदला लेने का ऐलान कर दिया हैं।

जनरल केनेथ मैकेंजी , यूएस सेंट्रल कमांड ने कहा हैं “अपने ISIS के आतंकियों को ढूंढ निकलने की बात कि तो हा, अगर हमें पता चलता है कि कौन इससे जुड़ा है तो हम उसके पीछे पड़ जायेंगे। हमने हमेशा कहा हैं कि अफगानिस्तान में ISIS के खिलाफ कार्यवाही का अधिकार हमारे पास है और इस वक्त हम पूरी ताकत से ये पता लगाने में जुटे है कि इस कायराना हमले को किसने अंजाम दिया और हम इसके खिलाफ कार्यवाही के लिए तैयार है। 24 X  7 हम उन्हें ढूंढ रहे हैं।”

अमेरिका के गम और गुस्से की वजह उसके सैनिक काबुल एयरपोर्ट पर तड़पते लोगों को राहत दे रहे थे। सैकड़ों अफगानी को देश से बाहर निकालने के लिए अपनी जान को जोखिम में डाल रहे थे। जिस वक्त धमाका हुआ। उस वक्त भी वह अफगानिस्तान छोड़ने वाले लोगों के कागजात को चेक कर रहे थे। ऐसे में हुआ आतंकी हमला नासिर सामान्य था।

बल्कि बेहद बर्बर और क्रूरता से भरा। पिछले 18 महीनों में एक भी अमेरिकी सैनिक कि अफगानिस्तान में मौत नहीं हुई। ऐसे में घातक हमले के बाद अमेरिका ने ठान लिया है कि वह हमले का आदेश देने वाले आईएसआईएस खुरासान गुट के नेताओं को कहीं से भी ढूंढकर उसका सफाया करेगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब अमेरिका अफगानिस्तान छोड़कर लगभग जा चुका है। तो फिर ISIS-K गट के खिलाफ कार्रवाई कैसे करेगा।

By Rajesh