पढ़िए अफगानिस्तान की पहली महिला एयरफोर्स पायलेट की दुःख भरी दास्ताँ

एक ओर जहां तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया है। तालिबान के खौफ से लोग दहशत में है। वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान से लगातार महिलाओं से ज्यादती करने की खबरें सामने आ रही है। तालिबान को महिलाओं का विरोधी माना जाता है और अफगानिस्तान की महिलाओं के लिए तालिबानी राज को एक बड़ा खतरा बताया जाता है।

इन सबके बीच हम आपको उस महिला के बारे में बताते हैं जो अफगानिस्तान की पहली महिला पायलट रही है। इस समय वह अमेरिका में है और एक इंटरव्यू में अपने देश के हालात पर चिंता जताई है। पिछले दो दशकों में यहां पर कई ऐसी हस्तियां सामने आए जिन्होंने अपनी-अपनी तरीकों से देश के इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया है।

इन्हीं कुछ नामों में एक नाम है नीलूफर रेहमानी का जिन्होंने एयरफोर्स की यूनिफार्म पहन कर एक नया इतिहास रचा था। नीलोफर ने तालिबान की हर धमकी को नजरअंदाज किया और अपनी उस लक्ष्य को हासिल किया जो आज अफगानिस्तान की हर लड़की का सपना है। अफगानिस्तान के हालात पर नीलोफर का कहना है कि “तालिबान महिलाओं को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा।

दुनिया तालिबान तालिबान का गवाह है। वह काबुल स्टेडियम को एक बार फिर से बिना कुछ किए बर्बाद करने जा रहे हैं। दुर्भाग्य से मेरा परिवार अभी भी है और जब से मेने सुना है कि अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हो रहा है। मैं सो नहीं पाई हूं। मैं अपने आप को एक जगह शांत नहीं कर पा रही हूं। मैं उनकी सुरक्षा के लिए बहुत डरती हूं और जाहिर है यह केवल मेरे बारे में नहीं है।

निलोफर ने कहा कि तालिबान ने उनके पूरे कैरियर में उनका समर्थन न करने के लिए उन्हें चिन्हित किया है। उन्हें तालिबान से 2013 से जान से मारने की धमकी मिल रही थी। 29 वर्ष की निलोफर अफगानिस्तान एयरफाॅर्स के इतिहास में पहली महिला फिक्सविन पायलट रही है।

1992 में अफगानिस्तान में जन्मी निलोफर का सपना बचपन से ही एक पायलट बनने का था वर्ष 2011 में जब निलोफर अफगान एयर फोर्स अकैडमी में सेकेंड लेफ्टिनेंट बनकर निकली तो उन्हें और उनके परिवार को तालिबान की ओर से जान से मारने की धमकियां मिली। उनके परिवार और नीलोफर ने हिम्मत नहीं हारी और नीलूफर अपनी ड्यूटी पूरा करती रही।

जिस समय  निलोफर का जन्म हुआ। उस समय अफगानिस्तान में सोवियत वॉर चल रहा था। उनके पिता भी अफगान एयरफोर्स का हिस्सा रह चुके हैं। साल 2001 में जब तालिबान अफगानिस्तान में पूरी तरह से खत्म हुआ तो निलोफर के सपनों को पंख मिलने लगे। तालिबान की तरफ से धमकिया मिलने का सिलसिला जारी था। लेकिन इसके बाद भी वह मेहनत करती रही।

साल 2015 में उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग के तहत आने वाले इंटरनेशनल विमेन ऑफ करेज अवार्ड से नवाजा गया। अफगानिस्तान में लेडी पायलट को इस बात की आजादी नहीं है कि वह किसी घायल या फिर मृत सैनिकों को ट्रांसपोर्ट करें। लेकिन जब कभी भी निलोफर को आदेश मिला उन्होंने उसे हमेशा पूरा किया और कोई हिचक नहीं दिखाई।

साल 2018 में अमेरिका की तरफ से उन्हें शरण दी गई थी। रहमानी की मानें तो उन्हें लगता है कि वह अमेरिका में सुरक्षित है। सुरक्षा कि इस भावना के बाद भी नीलोफर अपने उस सपने के टूट जाने की वजह से दुखी हैं जिसने उन्हें आसमान में उड़ना सिखाया। फिलहाल वह फ्लोरिडा में एक ट्रांसलेटर की जॉब करती हैं। तीन भाषाओं पारसी, दाढ़ी और इंग्लिश बोलने में माहिर निलोफर का सपना अब अमेरिकी वायुसेना के लिए प्लेन उड़ाना है।

By Rajesh