दार्जलिंग और हिमालय की वादियों में फिरसे चल परी टॉय ट्रैन

एक लंबा इंतजार और फिर से शुरू हो गई टॉय ट्रैन। कभी खाइयो के किनारे तो कभी जंगलो में। फिरसे सुनाई देने लगी छुक-छुक की आवाज। विश्व धरोहर में शामिल यह टॉय ट्रेन कोविड-19 महामारी के कारण पिछले करीब 1 साल से बंद थी। लेकिन अब फिर से न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच की ट्रेन दौड़ने लगी है।

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे की तरफ से आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की गई। दार्जलिंग से इस ट्रैन को ऑपचारिक तौर पर दार्जलिंग हिमालयन रेलवे के तौर पर जाना जाता हैं। तो जब दोबारा यह ट्रेन चली है तो उत्साह उन यात्री में भी देखने को मिला जो इस ट्रैन मे फिर से सफर के लिए आए।

सीसे वाली छत और वादियों के बीच निकलती यह टॉय ट्रेन नजारा बिल्कुल मनमोहक रहा।  कभी यह ट्रेन सड़क के किनारे तो कभी बीच सड़क से ही बदले रास्ता फिर घने जंगलों में सफर की आई पारी। हालांकि पहले के मुकाबले इस ट्रेन में सफर करना थोड़ा महंगा हो गया।

पहले एक यात्री का किराया था ₹1000 लेकिन अब किराए में बढ़ोतरी की गई है एक यात्री का नया किराया अब 1200  रुपए हो गया हैं। कई दिनों के बाद शुरू होने के साथ इस ट्रैन में एक आवर खास चीज को जोड़ा गया हैं। ट्रैन में एक पार्सल वन को भी जोड़ा गया हैं। 30 साल बाद ट्रेन में पास पार्सल वैन लगा है।

पार्सल वैन के जरिए 5 टन सामान भेजा जा सकेगा और पार्सल वैन के लिए किराया होगा ₹5000 रूपए। ट्रेन की शुरुआत हुई तो रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। बड़े हर्षोल्लास के साथ ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस ट्रैन की एक अलग ही पहचान। 1879  से लेकर 1881 के बीच ब्रिटिश काल में इससे बनाया गया था।

क्या था। न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच यह ट्रेन चलती है। करीब 88 किलोमीटर का सफर तय करती है। तेरी मेरी ट्रक के साथ धनी जंगलों से भी यह ट्रेन गुजरती है। 2 महीने से दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे प्रशासन ने टॉय ट्रैन की बहाली को लेकर तयारी शुरू की थी।

जिला प्रशासन की अनुमति के लिए पत्र भी लिखा गया था लेकिन उस वक्त जिला प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं मिल पाई थी। बताया जा रहा है कि जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ेगी वैसे-वैसे टॉय ट्रैन की संख्या में भी इजाफा किया जाएगा।

By Rajesh