काबुल हमले के 48 घंटे के भीतर अमेरिका ने किया ड्रोन एयर स्ट्राइक

अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट समूह के सदस्यों पर हवाई हमला किया है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि इस्लामी समूह के योजना करता को निशाना बनाया गया। जिसने गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट पर बड़े हमले को अंजाम दिया था।

इन हमलों में 177 लोगों की मौत की बात कही जा रही है। जिनमें कम से कम 13 अमेरिकी सैनिक भी शामिल है। इन हमलों की जिम्मेदारी अफगानिस्तान में आईएस के घड़े इस्लामिक स्टेट खुरासान ने ली थी। अमेरिका ने कहा है कि उसने नागाहार प्रांत में भ्रूण से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है और इसमें आईएस के जिस लक्ष्य को निशाना बनाया गया था।

उसके मारे जाने की संभावना है। गुरुवार को धमाकों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को ढूंढ निकाला जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों ने इस संभावित हमलों को देखते हुए काबुल में अपने नागरिकों को नई चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वे एयरपोर्ट के मुख्य रास्तों से दूर रहें। वहीं वरिष्ठ तालिबान अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने काबुल एयरपोर्ट के अंदर पोजीशन ले ली है और अमेरिकियों के जाते ही पूर्ण नियंत्रण संभालने को तैयार है।

दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि वह आखिरी लम्हों तक अफगान लोगों को निकालेगा और उसकी सेना के पास अब भी जगह पर नियंत्रण है। इस बीच पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के मसले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सीमा सुरक्षा पर कई बातें कहीं।

इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस यानी आईएसपीआर के महानिदेशक मेजर जनरल बाबर इफ्तेकार ने इस दौरान कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान सीमा पर कुछ हो सकता है। लेकिन किसी भी तरह की परिस्थिति के लिए हम तैयार हैं। उनका कहना था कि अफगानिस्तान में सैन्य हालात तेजी से बदले हैं। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि इतनी तेजी से हालात बदल जाएंगे।

उन्होंने कहा कि वहां पर आशंका हमेशा रहती है। लेकिन इस सबके बावजूद सीमा पर परिस्थितियां सामान्य है और नियंत्रण में है। क्योंकि सीमा पर या देश के अंदर अभी तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। गौर करने वाली बात है कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से ही हालात स्थिर बने हुए हैं।

तालिबान के शासन से डरकर कई अफगान लोग अपना देश छोड़ने की कोशिश में लगे हैं। काबुल एयरपोर्ट पर ऐसे लोगों की भीड़ है जो किसी भी हाल में अफगानिस्तान छोड़ने को आतुर हैं। इसके साथ ही कई अन्य देश भी अपने नागरिकों को अफगानिस्तान से निकालने के मिशन में जुटे हुए हैं।

By Rajesh