अब देश की संपत्ति किराये पर दी जा रही है, सरकार से संपर्क करें और देश की संपत्ति खरीदें

बीते बजट में सरकार ने बड़े स्तर पर डिस-इन्वेस्टमेंट यानी विनिवेश का ऐलान किया था। आसानी से समझें तो सरकारी कंपनियां यानी पीएसयू में सरकार की अपनी हिस्सेदारी का हिस्सा प्राइवेट को बेचने का काम करती है। उसे ही कहा जाता है डिस-इन्वेस्टमेंट दरअसल विनिवेश सरकार के लिए पैसे जुटाने का एक बड़ा रास्ता है जिसे सरकार अपना राजकोषीय घाटा कम करना चाहती है।

विनिवेश से सरकार को दूसरी योजनाओं पर खर्च करने के लिए पैसा मिलता है जिसे डिवेलपमेंट प्रोजेक्ट में लगाया जाता है। अब सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए नेशनल मॉनीटाइज़शन पाइपलाइन लॉन्च करते हुए साल 2022 के 2025 तक यानी 4 साल में 6 लाख करोड़ रुपये के ऐसेट्स की संपत्ति बेचने की प्लानिंग की है।

मोटे तौर पर सरकार रोड, रेल, बिजली, गैस, पावर, एयरपोर्ट, पाइपलाइन और नैचुरल गैस ऐविएशन, शिपिंग, टेलीकॉम, माइनिंग से पैसे जोड़ने की योजना बनाई है जिसमें सरकार की फाइनैंशल ईयर में करीब 85 हजार करोड़ रुपये कमाने की योजना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रोग्राम लॉन्च करते हुए कहा कि सरकार केवल कम उपयोग में आने वाली संपत्तियों को ही बेचेगी।

इनका अधिकार सरकार के पास ही होगा और प्राइवेट पार्टनर्स को एक तय समय बाद इन संपत्तियों को वापस करना होगा। हम कोई जमीन नहीं बेच रहे हैं। प्राइवेट भागीदारी से हम इस सच को बेहतर ढंग से मॉनीटाइस कर रहे हैं। मॉनीटाइज़शन से मिलने वाले संसाधनों को इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डिंग में निवेश किया जाएगा।

अब बात आती है कि आखिर सरकार क्या बेचने की तैयारी में है तो नीति आयोग के अलग-अलग विभागों की हिस्सेदारी को साफ करते हुए बताया है कि सरकार 2025 तक नेशनल इंफ्रास्टक्चर प्लान से देश की कुल 14 प्रतिशत का  हिस्सा यानी 6 लाख करोड़ रुपये रेलवे सड़क और पावर से आएंगे। इसमें खासतौर पर रेलवे स्टेशन 15 रेलवे स्टेडियम स्ट्रीट माउंटेन सहित बेचे जाएंगे।

इसके साथ ही कुल 25 नए और मौजूदा एयरपोर्ट्स और 160 कोयले की खानों में केंद्र सरकार की खदानों में हिस्सेदारी की जाएगी। इसके अलावा दो बड़े पोर्ट भी बेचे जाएंगे। नेशनल स्टेडियम भी इस लिस्ट में मॉनीटाइस होंगे। सरकारी कंपनियां यानी पीएसयू के गैस्ट हाउस भी पीपीपी मोड में आएंगे।

अगर एक हिसाब से अलग-अलग तरह की संपत्तियों से मिलने वाले पैसों के टारगेट की बात करें तो सरकार अगले चार साल में करीब 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपये के रोड बेचकर पैसे कमाने की जुगत में है। वही रेलवे ने डेढ़ करोड़ से ज्यादा का टारगेट रखा है।

पावर ट्रांसमिशन से 45 हजार करोड़ और पावर जनरेशन से करीब 40 हजार करोड़ के ऐसेट्स को प्राइवेट सेक्टर में बेचने का प्लान है। 25 हजार करोड़ नैचुरल गैस पाइपलाइन का तो टेलीकॉम 35 हजार करोड़ का, माइनिंग 29 हजार करोड़ का, एयरपोर्ट 20 हजार करोड़ की हिस्सेदारी बेचकर कमाने का सरकार का लक्ष्य है।

By Rajesh