अफगानिस्तान......खुद को राष्ट्रपति घोसित किया आमिर उल्लाह साले ने और बनाई अपनी सेना

बेशक तालिबान का काबुल पर कब्जा हो। बेशक तालिबान अफगानिस्तान पर अपना हुक्म जमाना चाहता हो। बेशक तालिबानियों का खौफ हो। लेकिन एक ऐसा प्रांत भी है। जो न तालिबानी से डरा था। ना डर रहा है। डटकर सामना कर रहा है। वह प्रांत है पंजशीर घाटी। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से बचे एकमात्र पंजशीर घाटी में लड़ाई खतरनाक मोड़ पर जाती दिख रही है।

पंजशीर घाटी अफगानिस्तान के उन चंद इलाकों में से है जहां अब तक तालिबान का कब्जा नहीं हुआ है। पंचशील से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि अबतक हुई लड़ाई में 50 से अधिक तालिबानी लड़ाके मारे गए और 20 से अधिक लड़ाकों को बंधक बनाया गया है। इस लड़ाई में तालिबान के क्षेत्रीय कमांडर के मारे जाने का दावा भी किया जा रहा है।

वहीं पंजशीर समर्थक एक लड़की की मौत हुई है और 6 घायल हुए हैं। हालांकि तालिबान से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। खबरों के मुताबिक क्रूर तालिबान लड़ाके का कहना है कि पंजशीर को माफ नहीं किया जाएगा। रविवार यानी 22 अगस्त की रात तालिबान से जुड़े एक सूत्र ने दावा किया था कि वहा के अफगानो पर फिर से तालिबान का नियंत्रण हो गया है।

बता दे कि अंतराव से पहले 300 तालिबानियों को पंजशीर में भी मार गिराया गया था। पंजशीर घाटी में विद्रोहियों की अगुवाई कर रहे अहमद मसूर के लड़ाके जंग के लिए तैयार हैं। नार्थ सेना को लीड कर रहे मसूद ने कहा कि युद्ध की तैयारी है पर अगर रास्ता निकालने के लिए बातचीत होती है। उसके लिए भी हम तैयार हैं।

वहीं तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पंचशील घाटी को तीन तरफ से घेरे जाने की जानकारी दी और ट्विटर पर लिखा “अमीरात मामले को शांति के साथ सुलझाना चाहता है। बता दें कि तालिबान के खिलाफ यहां नार्थ सेना, अफगानी सेना और अन्य कुछ विद्रोही लडको ने मोर्चा संभाल रखा है”।

पंजशीर घाटी पर कब्जा जमाने की तैयारी कर रहे तालिबान को आमिर उल्लाह सालेह और अहमद मसूर की ओर से कड़ी टक्कर मिल रही है। सालेह अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति थे। लेकिन अशरफ गनी के देश छोड़े जाने के बाद उन्होंने खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया। साथ ही वे पंजशीर चले गए और यहां अहमद मसूद से हाथ मिला लिया।

अहमद मसूद ने पंचशील में विद्रोही नेताओं के साथ हाथ मिलाया है। अफगानी फौजो और तालिबानी विद्रोहियों को भी इकठ्ठा कर लिया है। अफगानिस्तान में कुल 34 प्रान्त है इनमें से 33 पर तालिबान का कब्जा है। लेकिन इन सबके बावजूद भी पंजशीर से तालिबान की लड़ाई आसान नहीं है।

एक न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक पंजशीर घाटी में 10,000 से ज्यादा फौजी तालिबान से लड़ने को तैयार है इस फौजी को लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है। बता दे कि 15 अगस्त को 20 साल बाद एक बार फिर से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है। काबुल पर कब्जा होते ही अफगानिस्तान के राष्ट्रपति देश छोड़कर चले गए। अमेरिका, कनाडा, भारत समेत अपने नागरिकों का काबुल एयरपोर्ट से रेस्क्यू कर रहा है।

By Rajesh