अफगानिस्तान के IT मंत्री जर्मनी में पिज़ा बेचने पर मज़बूर हैं।

अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा है और लोगों में देश छोड़कर जाने के लिए अफरा-तफरी मची है। तालिबान के खूनी एजेंडे से डर कर आम लोगों के साथ सत्ता के शिखर पर बैठे लोग भी देश छोड़कर भाग रहे है। 20 साल बाद जैसे ही दोबारा तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया।

वैसे ही राष्ट्रपति अशरफ गनी समेत कई बड़े नेता देश छोड़कर चले गए। इस बीच अफगानिस्तान के एक मंत्री की जर्मनी से कुछ तस्वीरें सामने आई है। जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल अफगान सरकार में संचार मंत्री रहे सैयद अहमद शाह सादात ने तालिबान के सत्ता में आते ही अफगानिस्तान छोड़ दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक वह इस वक्त जर्मनी में है। येथी न्यूज़ के द्वारा शेयर की गई तस्वीर के मुताबिक अफगानिस्तान में पूर्व मंत्री अहमद शाह जर्मनी में पिज़्ज़ा डिलीवरी करते हुए नजर आ रहे हैं। अहमद अफगान पर तालिबान के कब्जे के वक्त मंत्री नहीं थे। वह इस पद से 1 साल पहले ही इस्तीफा दे चुके थे। अब खबर अफगानिस्तान के पूर्व मंत्री व जर्मनी में पिज़्ज़ा डिलीवरी कर गुजारा कर रहे हैं।

सामने आई तस्वीरों में उन्हें जर्मनी के लेब्रिन में साइकिल पर पिज़्ज़ा डिलीवरी करते हुए दिखाए गए। अहमद शाह की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। हालांकि उसको लेकर पूर्व मंत्री का कोई बयान सामने नहीं आया। जब अफगानिस्तान में लोकतंत्र का राज था तो सैयद अहमद शाह सादात राजा थे।

तालिबान आया और सैयद अहमद शाह जर्मनी पहुंचे। लेकिन तस्वीर देख कर यकीन करना मुश्किल है कि एक चारों ओर सुरक्षा कर्मियों के सख्त पहरे के बीच सूट-बूट में रहने वाले सैयद अहमद दूसरा आज पिज़्ज़ा डिलीवरी करने को मजबूर हैं। दिसंबर 2020 में ही सैयद अहमद शाह अफगानिस्तान छोड़कर जर्मनी भाग गए थे।

सैयद बेहद पढ़े-लिखे भी है। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कम्युनिकेशन में एमएससी किया है। साथ ही वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर भी हैं। सैयद अहमद शाह ने दुनिया भर के 13 बड़े शहरों में 23 साल अलग-अलग तरह का काम की लेकिन शायद देश छूटा तो किस्मत ने भी साथ छोड़ दिया था।

इतना पढ़ लिख कर भी घर-घर पिज़्ज़ा पहुंचाने के लिए मजबूर है। सैयद अहमद शाह ने एक न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए कहा “शुरुआती दिनों में मुझे इस शहर में रहने के लिए कोई काम नहीं मिल रहा था क्योंकि मुझे जर्मन भाषा नहीं आती पिज़्ज़ा डिलीवरी का काम फिलहाल मैं सिर्फ भाषा सीखने के लिए कर रहा हूं। इस नौकरी के जरिए मैं शहर के अलग-अलग हिस्से में घूमकर लोगों से मिल रहा हूं ताकि आने वाले दिनों में खुद को निखार कर दूसरी नौकरी कर सकूं।”

बता दे कि एक बार फिर से 20 साल बाद तालिबान की एंट्री के बाद अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अफरा-तफरी का माहौल है। हर कोई देश से भागना चाहता है। इस कड़ी में राष्ट्रपति अशरफ गनी भी काबुल से भागकर संयुक्त अरब अमीरात में बस गए।

हालांकि गनी ने कहा है कि “मैं देश छोड़कर नहीं आता तो कत्लेआम हो जाता और खून खराबा होता इसलिए मुझे हटना पड़ा।” वहीं काबुल एयरपोर्ट पर अब भी लोगों को अफगानिस्तान से निकलने का काम जारी हैं। अमेरिका ब्रिटेन और भारत समेत कई देशों अपने नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी में लगे हैं। इस दौरान एयरपोर्ट पर कई बार दर्दनाक मंजर भी देखने को मिले।

By Rajesh